Career Oriented Courses - ( रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम )


करियर इन होटल मैनेजमेंट


होटल में कार्य के क्षेत्र :
यों तो किसी भी होटल के आकार-प्रकार, स्थान आदि पर निर्भर करता हैं कि वहां कितने व्यक्ति किस प्रकार का कार्य करेंगे, फिर भी कुछ विशेष प्रकार के कार्य क्षेत्रों को निम्न भागों में बांटा जा सकता हैं।
प्रबंध संबंधी कार्य (Management Jobs) :
प्रायः सभी प्रकार के होटलों में प्रबंधक अथवा सहप्रबंधक का कार्य यह देखना होता हैं कि आने वाला मेहमान सुविधापूर्वक रहें। यह प्रबंधक की जिम्मेदारी होती हैं कि होटल का प्रबंध इस प्रकार रहे कि होटल के सारे कार्य सुगमतापूर्वक चलते रहें, साथ ही होटल बनाने वाली कम्पनी लाभ में चलती रहें। छोटे होटल में एक मैनेजर ही सारे प्रबंध देखने के लिए पर्याप्त होता हैं। जबकि बड़े होटलों में अलग क्षेत्र के कार्य के लिए अलग प्रबंधक व सह प्रबंधक नियुक्त किए जाते हैं।
होटल क विभिन्न खर्चों का वितरण, निश्चय, कमरों का किराया, यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाएं, होटल की सजावट आदि का नियंत्रण वह उप प्रबंधक के साथ मिलकर करता हैं। कुछ होटलों में हर समय रहने वाले मैनेजर (Resident Managers) भी होते हैं। वैसे तो वे निश्चित समय में कार्य करते हैं, फिर भी आवश्यकता होने पर 24 घंटे में किसी भी समय बुलाया जा सकता हैं।
कैटरिंग विभाग (Catering Department) :
कैटरिंग अर्थात्‌ खान-पान भोजन की व्यवस्था करने वाला विभाग। इस विभाग में भी अलग मैनेजर होता हैं। जिसे फूड एंड बेवेरेज मैनेजर (Food and Beverage Manager) कहा जाता है। इसके अतिरिक्त एक बैंक्वेट मैनेजर (Banquet Manager) होता हैं। इन्हीं की देखरेख में खान-पान विभाग हर प्रकार के भोजन की व्यवस्था करता हैं।
किसी भी अच्छे होटल या रेस्टोरेंट में ये मैनेजर ही तय करते हैं कि मीनू में क्या चीजें हों तथा उनके क्या दाम निर्धारित किए जाएं। इन्हीं मैनेजर का कार्य भोजन की उत्तम क्वालिटी, सर्विस व तैयारी की देखरेख भी करना होता हैं। अधिक बड़े होटलों में फूड एंड बेवेरेज मैनेजर की सहायता हेतु सहायक मैनेजर (Assistant Manager) भी होते हैं।
फूड सर्विस मैनेजर का कार्य किसी भी रेस्टोरेंट के लिए बर्तन (परोसे जाने वाले व पकाने के लिए) नैपकिन, मेजपोश, फर्नीचर, बर्तन साफ करने के लिए सामग्री व अन्य सजावट की देखभाल करना होता हैं। उसे समय-समय पर इन वस्तुओं की सप्लाई करने वाले लोगों से मिलते रहना पड़ता हैं।
कैटरिंग विभाग के बैंक्वेट मैनेजर का कार्य व्यवस्था के अतिरिक्त समस्याओं को सुलझाना भी होता हैं। कई बार शाम को या भीड़-भाड़ के वक्त कोई ग्राहक गुस्से में भर उठता हैं या कोई होटल कर्मचारी किसी से झड़प कर बैठता हैं तो मैनेजर को ही मामला निपटाना पड़ता हैं।
कैटरिंग विभाग में स्टिवर्ड (Steword) का विभाग तथा भोजन व्यवस्था विभाग भी होता हैं। स्टिवर्ड विभाग यह देखता हैं कि भोजन परोसने आदि की व्यवस्था ठीक-ठीक हैं।
अच्छे होटल व रेस्टोरेंट के कैटरिंग विभाग में वेटर व वेटरेस (महिला वेटर) होटल व होस्टेस (ग्राहकों के स्वागत के लिए) होते हैं, जो ग्राहकों को सीट तक पहुंचाते हैं व उनका ऑर्डर लेते हैं, बिल का भुगतान लेते हैं।
ऑफिस विभाग (Front Office Department) :
हर बड़े होटल का एक ऑफिस विभाग होता हैं जो ग्राहक के होटल में पहुंचने पर सबसे पहले सम्पर्क में आता हैं और उनका स्वागत करता हैं।
ऑफिस प्रबंधक (Office Manager) का कार्य लोगों के लिए कमरे बुक कराना, रिसेप्शनिस्ट का कार्य सूचना क्लर्क के कार्य की निगरानी, बेल कैप्टेन (Bell Captain) कमरे के कार्य करने वाले लड़के (Bell Boy) व दरवाजे के चौकीदार आदि के कार्यों का नियंत्रण व देखभाल करना हैं।
ऑफिस प्रबंधक को यह भी देखना होता है कि किसी भी ग्राहक या मेहमान के साथ भद्रता से पेश आया जाए तथा उन्हें कोई शिकायत न हो। यदि किसी ग्राहक को कोई विशेष सहायता या कार्य की आवश्यकता हो तो उसके लिए वह सहायता उपलब्ध कराई जाए।
रिसेप्शनिस्ट का कार्य आने वाले ग्राहकों का स्वागत व उसके लिए कमरे का प्रबंध करना होता हैं। बेल बॉय का कार्य मेहमान के सामान को कमरे तक पहुंचना हैं। बेल कैप्टेन का कार्य बेल बॉय कके कार्यों की देखभाग करना हैं। सूचना क्लर्क का कार्य मेहमानों के लिए आने वाले टेलीफोन या सूचना को मेहमान तक पहुंचाना हैं।
गृह विभाग (Housekeeping Department) :
जिस प्रकार किसी घर की साज-संभाल की आवश्यकता होती हैं, उसी प्रकार होटल की भी साज संभाल होती हैं। होटल भी एक प्रकार का घर हैं, एक बड़ा घर। यहां कमरों, बरामदों, लॉबी, रेस्टोरेंट, स्विमिंग पूल, पार्क, भोजन करने के कमरे आदि की सफाई की व्यवस्था के लिए हाउस कीपिंग विभाग होता हैं। जिसका मुखिया प्रशासनिक हाउस कीपर होता हैं। यह उसका ही दायित्व होता है कि कहां कौन-सी दीवार पर पेंटिंग लगाई जानी है या गमले सजाए जाने हैं।
एक्जीक्यूटिव हाउस कीपर अपने अधीन कर्मचारियों के कार्य, सफाई आदि की निगरानी करता हैं। कई मंजिल वाले होटल में अलग-अलग मंजिल का कार्य अलग-अलग कर्मचारियों में बांट दिया जाता हैं। कमरे की चादर व तौलिए बदलना, बाथरूम की सफाई के लिए रूम-बॉय या रूम मेड होती हैं। ये गन्दे तौलिए-चादर मेजपोश व नैपकिन आदि धुलने के लिए भेजते हैं।
लेखा-जोखा विभाग (Account Department) :
हर होटल में रख-रखाव पर ढेरों रूपया खर्च होता हैं, तरह-तरह की वस्तुएं, सजावट की सामग्री आदि खरीदी जाती हैं, उन सब चीजों पर होने वाले खर्च का लेखा-जोखा रखना पड़ता है। उसके लिए चीफ एकाउन्टेट (Chief Accountant), चार्टर्ड एकाउन्टेट, कैशियर क्लर्क, आडीटर आदि की आवश्यकता पड़ती हैं। एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट मैनेजर के अधीन चीफ एकाउन्टेट व अन्य लोग कार्य करते हैं।
सेल्स व मार्केटिंग विभाग (Sales and Marketing Division) :
आज उद्योगों व कम्पनियों में आगे निकलने की होड़-लगी हुई हैं। कम्पनियों को व्यापारिक सेमिनार, मीटिंग, कन्वेंशन पार्टियां होटलों में ही होती हैं। हर बड़ी कम्पनी या उद्योग होटल में मौजूद सुविधाओं के अनुसार होटल का चयन करते हैं अतः सेल्स व मार्केटिंग विभाग का कार्य होता हैं कि वह उन सुविधाओं की जानकारी रखे व अपने होटल में उन्हें उपलब्ध कराए।
होटलों का वर्गीकरण
भारत के चारों महानगरों में अधिकांश होटलों की स्थापना की गई है। गिने-चुने होटल अन्य स्थानों पर भी हैं। दिनोंदिन होटलों का विस्तार होता जा रहा हैं। केवल दिल्ली में यात्रियों के रहने की व्यवस्था अन्य शहरों की अपेक्षा 22 प्रतिशत हैं। होटलों को टूरिज्म विभाग की ओर से मान्यता प्रदान की जाती है तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर वर्गीकरण किया जाता हैं। मुखया रूप से इन्हें निम्न क्षेत्रों में बांटा जा सकता हैं--
पब्लिक सेक्टर (Public Sector) :
इसमें भारत पर्यटन विकास निगम (Indian Tourism Development Corporation-ITDC) के होटलों की श्रृंखला, राज्यों के पर्यटन विभाग, सरकारी एजेंसी या उनके अन्तर्गत काम करने वाले संगठन शामिल हैं।
प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) :
वे होटल जो अन्तर्राष्ट्रीय खयातिप्राप्त नामों से जुड़े हैं, किसी भारतीय के कारपोरेट होटल, अन्तर्राष्ट्रीय श्रृंखला वाले होटल, किसी प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी द्वारा संचालित होटल हैं। ये प्रायः उच्च सुविधाओं से युक्त होटल होते हैं तथा किराया अपेक्षाकृत अधिक होता हैं। विदेशी पर्यटकों, बड़ी कम्पनियों के एक्जीक्यूटिव, डायरेक्टर आदि इन होटलों में ही रहना पसन्द करतें हैं। यहां प्रतिनिधियों की मीटिंग, सेमिनार आदि होती हैं। बड़े-बड़े पर्यटक समूह (Group Tourists) के ठहरने का प्रबंध होता हैं।
अन्य पूरक व्यवस्था (Supplementary Accommodation) :
प्राइवेट गेस्ट हाउस, यूथ होस्टल, टूरिस्ट बंगले अथवा रेस्ट हाउस आदि इनमें शामिल हैं। ये होटल प्रायः छोटे व अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं। ये छोटी कम्पनियों, व्यक्तियों, ट्रस्ट, संस्थाओं द्वारा चलाए जाते हैं। यहां भी ट्रेनिंग लिए हुए व्यक्तियों की नियुक्ति की जाती हैं।
प्रवेश
किसी भी होटल प्रबंधन में प्रवेश हेतु निम्न विधियां अपनाई जा सकती हैं--
कोई डिग्री अथवा डिप्लोमा कोर्स
किसी मान्यता प्राप्त फूड क्राफ्ट इंस्टीट्‌यूट या होटल मैनेजमेंट व कैटरिंग स्कूल से कोर्स करने के पश्चात्‌ प्रवेश
किसी होटल में ट्रेनी बनकर शामिल हों तथा ट्रेनिंग के अन्त में प्रबंध स्तर पर शामिल हो जाएं।
फ्रंट ऑफिस के लिए किसी विशेष योग्यता या औपचारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती। प्रायः सभी होटल स्नातक युवक-युवतियों को चुनकर उन्हें स्वयं ट्रेनिंग देते हैं व उनके व्यक्तित्व व भाषा व योग्यता में निखार लाते हैं।
प्रमुख पाठ्‌यक्रम (कोर्स) होटल मैनेजमेंट व कैटरिंग-डिप्लोमा कोर्स
(Hotal Management and Catering-Diploma Course) :

कोर्स की अवधि-3 वर्ष। प्रवेश की योग्यता-50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं (10+2) उत्तीर्ण। चयन-लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के आधार पर। अधिकतम आयु-22 वर्ष। अनुसूचित जाति के लिए 15 प्रतिशत व अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं।
पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा-होटल एडमिनिस्ट्रेशन
(Post-Graduate Diploma-Hotel Adminostration) :

पाठ्‌यक्रम की अवधि-डेढ़ वर्ष। प्रवेश योग्यता-होटल मैनेजमेंट में 3 वर्षीय डिप्लोमा अथवा समकक्ष योग्यता सहित स्नातक। अधिकतक आयु-33 वर्ष।
एकोमोडेशन व मैनेजमेंट-मोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा
(Accommodation and Management-Post Graduate Diploma) :

कोर्स की अवधि-डेढ़ वर्ष, प्रवेश योग्यता किसी विषय में स्नातक, अधिकतम आयु-28 वर्ष।
फास्ट फूड ऑपरेशन-पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा
(Fast Food Operation-Post Graduate Diploma) :

कोर्स की अवधि-डेढ़ वर्ष। प्रवेश योग्यता-किसी विषय में स्नातक, अधिकतम आयु-28 वर्ष।
फूड एंड बेवेरेज- क्राफ्ट्‌समैन कोर्स
(Food & Beverage & Craftsman Course) :

कोर्स की अवधि-डेढ़ वर्ष, प्रवेश योग्यता-10वीं पास, अधिकतम आयु-22 वर्ष।
फूड प्रोडक्शन में क्राफ्ट्‌मैन कोर्स
(Craftsman Course in Food Production) :

कोर्स की अवधि-डेढ़ वर्ष, न्यूनतम योग्यता-10वीं पास, अधिकतम आयु-22 वर्ष।

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