Career Oriented Courses - ( रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम )


करियर इन फैशन डिजाइनिंग


परिधान उद्योग, फैशन व एक्सपोर्ट हाउस की दिनोदिन होती प्रगति ने कैरियर की दिशा में एक नया आयाम जोड़ा हैं- वह हैं फैशन डिजाइनिंग। यों तो भारत में यह उद्योग बहुत पुराना नहीं हैं।
इस उद्योग का विकास पिछले 10-12 वर्षों में तेजी के साथ हुआ हैं।
फैशन डिजाइन एक ऐसा ग्लैमरपूर्ण व्यवसाय है जिसमें बेशुमार पैसा हैं, साथ ही साथ उससे रचनात्मक संतुष्टि भी प्राप्त होती हैं। इसी कारण नौजवान युवक-युवतियां इन पाठ्यक्रमों की ओर तेजी से मुड़ रहे हैं। वैसे तो यह व्यक्ति की सृजनात्मक योग्यता पर निर्भर करता हैं कि वह इस क्षेत्र में कितना सफल होता हैं, फिर भी यदि मेहनत और लगन से डिजाइनिंग का कोर्स किया जाय तो सफलता अवश्य मिलती हैं।
फैशन व परिधान उद्योग की करोड़ों की टर्न ओवर इस व्यवसाय की सफलता की ओर ही इशारा करती हैं।
फैशन उद्योग से संबंधित क्षेत्र
फैशन से संबंधित निम्न प्रकार के डिप्लोमा कोर्स कराए जातें हैं।
1. डिजाइनिंग : यह 3 वर्षीय पाठ्यक्रम होता हैं। इसके लिए 12वीं में कम-से-कम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य हैं। यह कोर्स करने के पश्चात् एक्सपोर्ट हाउस में फैशन डिजाइनर, फैशन को-आॅर्डिनेटर, क्वालिटी कंट्रोलर, फैशन मर्चेण्डाइजर आदि के पदों पर काम मिल जाता हैं। इसी के अंतर्गत कास्ट्यूम ज्वैलरी, चमड़े का सामान बनाना भी सिखाया जाता हैं। आप चाहें तो स्वतंत्र कार्य करके भी अच्छी कमाई कर सकत हैं।
2. फैशन डिजाइनिंग : सामान्यतः यह 3 वर्ष का डिप्लोमा कोर्स होता है। इसमें भी विद्यार्थी के 12वीं के कम-से-कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए। अनुसूचित जाति के छात्र 45 प्रतिशत पर प्रवेश पा सकतें हैं। इसे करने के पश्चात् फैशन डिजाइनर, पैटर्न मेकर, स्टाइलिस्ट, फैशन को-आॅर्डिनेटर, फैशन इलस्ट्रेटर, के रूप में नौकरी या व्यवसाय किया जा सकता हैं।
3. मार्केटिंग व मर्चेण्डाइजिंग : यह डिप्लोमा कोर्स 2 वर्ष का होता हैं। इसमें वस्त्र व्यवसाय की बारीकियां समझाई जाती हैं। इस कोर्स को करने के पश्चात् फैशन टेक्नोलाजिस्ट की नौकरी बड़े प्रतिष्ठित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मिल जाती हैं। द्वितीय वर्ष के छात्र होने पर ही बड़ी कम्पनियां इण्टरव्यू के लिए बुलाना आरम्भ कर देती हैं।
4. गारमेण्ट मैन्यूफैक्चरिंग टेक्नोलाजी : यह 2 वर्ष का डिप्लोम कोर्स होता हैं। इसमें उत्पादन संबंधी कौशल सिखाया जाता हैं। इसके लिए स्नातक डिग्री होना अनिवार्य होता है।
5. चमड़े के वस्त्र व तकनीक : यह 2 वर्ष का डिप्लोम कोर्स होता हैं। इसमें प्रवेश के लिए स्नातक डिग्री होना अनिवार्य हैं। इस कोर्स के पश्चात् स्टाइलिस्ट लैदर डिजाइनर बनकर नौकर या व्यवसाय किया जा सकता हैं।
6. निटवियर डिजाइन व तकनीक : यह 2 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद किया जाता हैं।
7. टैक्सटाइल डिजाइन एंड डेवलपमेंट : इसमें कपड़ों की प्रिंटिग व डिजाइनिंग सिखाई जाती हैं। यह 2 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स स्नातक की डिग्री पाने के बाद होता है।
8. सहायक वस्तुओं की डिजाइनिंग : इसमें जूते, बेल्ट, हाथ के बैग, पर्स, स्कार्फ, आभूषण व घड़ियां आदि डिजाइन करना सिखाया जाता हैं। इसमें सीखने वालों को इसमें प्रयोग की जाने वाली सामग्री का बेहतर तरह से रख-रखाव करना भी आना चाहिए।
रोजगार की संभावनाएं
डिजाइनिंग का डिप्लोमा करने के पश्चात् निम्न में से कोई भी कार्य किया जा सकता हैः--
किसी प्रतिष्ठित डिजाइनर के साथ कार्य।
किसी वस्त्र कम्पनी या फैशन हाउस में फैशन डिजाइनर का कार्य करना, जो तरह-तरह के कपड़े बेचती हों।
फिल्म या टी.वी. या थियेटर के लिए कास्ट्यूम डिजाइनर का कार्य।
स्टाइलिंग का कार्य।
अपने बनाए व डिजाइन किए वस्त्रों की प्रदर्शनी व बिक्री।
स्वतंत्र रूप से भिन्न कम्पनियों के लिए डिजाइनिंग।

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